बजट में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने पर ज़ोर

30,42,230 करोड़ रूपए के कुल बजट में से इस बार बजट में शिक्षा के लिए 99 हज़ार 300 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं साथ ही कौशल विकास के लिए 3000 करोड़ रुपए का प्रावधान अलग से किया गया है

डॉ अरुण कुमार


केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने शनिवार दिनांक 1 फरवरी 2020 को मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा बजट प्रस्तुत किया। वित्त मंत्रालय द्वारा इस बजट को 'जन जन का बजट' की संज्ञा से सम्बोधित किया गया है। अपने बजट भाषण में निर्मला सीतारमण ने कहा कि कामकाजी उम्र के लिहाज से आने वाले समय में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश बनने जा रहा है। इस कारण भारत में शिक्षा-व्यवस्था और कौशल को दुरुस्त करने की बड़ी जिम्मेदारी हमारी सरकार के ऊपर है। आम बजट में सरकार ने इस जिम्मेदारी को समझते हुए बजट में कई प्रावधान किए हैं और पिछले वर्ष के मुक़ाबले अधिक धन भी आवंटित किए हैं। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बजट को तीन प्रमुख सिद्धांतों - एस्पिरेशनल इंडिया, इकोनॉमिक डेवेलपमेंट और केयरिंग सोसायटी पर केन्द्रित होने की बात कही। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में विदेशी छात्रों को भारत में शिक्षा ग्रहण करने हेतु आकर्षित करने के लिए 'स्टडी इन इंडिया' योजना की शुरुआत की गई थी। वहीं भारत के छात्रों को भी एशिया, अफ्रीका आदि देशों में अध्ययन के लिए जाने को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से कई योजनाएं शुरू की जा रही हैं। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के उद्देश्य से विदेशी व्यावसायिक ऋण और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को भी बढ़ावा देने की घोषणा की गई है।


इस बार युवाओं पर विशेष ध्यान है। उनके शिक्षा, रोजगार और कौशल पर इस बार अधिक ध्यान देने की बात कही गयी है। 30,42,230 करोड़ रूपए के कुल बजट में से इस बार बजट में शिक्षा के लिए 99 हज़ार 300 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं साथ ही कौशल विकास के लिए 3000 करोड़ रुपए का प्रावधान अलग से किया गया है। नई शिक्षा नीति शीघ्र ही लागू की जाएगी जिसमें शिक्षा के मद में खर्च बढाने की बात कही गई है।

मोदी सरकार ने बजट में शिक्षा क्षेत्र में कुल किए जाने वाले खर्च में लगातार बढ़ोतरी की है। वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए मोदी सरकार ने 94 हजार 8 सौ तिरपन करोड़ रुपए आवंटित किए थे। इससे पहले के वित्तीय वर्ष 2018-19 में जितने रुपए शिक्षा क्षेत्र के लिए आबंटित किए गए थे उससे 13 प्रतिशत अधिक रुपए इस बार आबंटित किए गए हैं।  मार्च 2021 तक 150 नए उच्च शिक्षण संस्थान शुरू करने की घोषणा इस बार के बजट में की गई है। इन संस्थानों में कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढाने के लिए डिग्री लेवल ऑनलाइन स्कीम भी शुरू करने की योजना है। इसके अलावा बजट में दो नए विश्वविद्यालयों 'राष्ट्रीय पुलिस विश्वविद्यालय’ और ‘राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय' खोलने का भी प्रस्ताव रखा गया है। डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए वर्ष 2021 तक नए संस्थान खोले जाने की भी बात कही गई है। 


मोदी सरकार की शिक्षा व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता उसके द्वारा बजट में आवंटित राशि से स्पष्ट होती है। सरकार ने न केवल शिक्षा का बजट बढ़ाया है बल्कि उसे रोजगारोन्मुखी बनाने का भी विशेष प्रबंध किया है।

उच्च शिक्षा के बजट में इस वर्ष 39466.52 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में 1100 करोड़ रुपए से अधिक की वृद्धि की गई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों के लिए भी इस बार का बजट लाभदायक रहा। इस बार उन्हें पिछले वर्ष की तुलना में 14. 38 प्रतिशत अधिक धन प्राप्त हो सकेंगे अर्थात इस बार उन्हें कुल 7,332 करोड़ रुपए की धनराशि प्राप्त होगी। राष्ट्रीय तकनीकी संस्थानों (एनआईटी) के लिए भी कुल आबंटन 3885 करोड़ रूपए है। यह राशि भी पिछले वर्ष की तुलना में 2.58 प्रतिशत अधिक है। केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के लिए इस बार कुल 8657.90 करोड़ रुपए आबंटित किए गए हैं जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.39 प्रतिशत अधिक है।


केन्द्र सरकार ने राज्यों की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को भी सुधारने की दिशा में इस बार के बजट के माध्यम से बड़ी पहल की है। वित्त मंत्री ने मेडिकल शिक्षा के लिए भी कई बड़ी घोषणाएं कीं। चिकित्सा सुविधा और चिकित्सकों की कमी को ध्यान में रखते हुए नए मेडिकल कालेज की स्थापना की बात कही है। राज्यों के लिए जिला अस्पतालों में मेडिकल कॉलेज की भी स्थापना की जाएगी। भारतीय शिक्षकों, नर्सों, पारा मेडिकल स्टाफ और केयरगिवर्स की विदेशों में भी पर्याप्त मांग है। उनके लिए विदेशों में भी रोज़गार के पर्याप्त अवसर हैं, उन्हें उसके अनुरूप तैयार करने की जरूरत है। इसका लाभ उठाने के उद्देश्य से भी बजट में सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। उन लोगों के लिए एक ब्रिज-कोर्सेज की शुरुआत की जा रही है ताकि उन्हें विदेशों में भी आसानी से नौकरी मिल सके।


समाज के वंचित वर्गों के जीवन को शिक्षा के माध्यम से ऊपर उठाने के लिए मोदी सरकार दृढ़ संकल्प है। उन्हें शिक्षा सुलभ हो सके इसके लिए डिग्री स्तर का सुव्यवस्थित ऑनलाइन शिक्षा कार्यक्रम शुरू की जा रही है। ये पाठ्यक्रम देश के शीर्ष 100 शैक्षणिक संस्थानों में शुरू किए जाएंगे। बजट ने आदिवासियों का भी पूरा ध्यान रखा है। आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एकलव्य आवासीय मॉडल विद्यालय योजना को 1313 करोड़ रुपए प्रदान किए गए हैं। वहीं खेलो इंडिया के बजट को भी सरकार ने बढ़ा दिया है। पिछले वर्ष इस योजना के लिए 578 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। इस बार यह राशि बढ़कर 890 करोड़ रुपए हो गई है। कुल मिलकर बजट जन जन का बजट है जिसमें भारतीय शिक्षा व्यवस्था को विकास के पूरे अवसर मिलेंगे।


(लेखक ने जेएनयू से पीएचडी की है। वर्तमान में वे दिल्ली विश्वविद्यालय के लक्ष्मीबाई कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं।)

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